नमस्कार सभी दोस्तों आज के अध्याय में हम वाक्य (The Sentence) की परिभाषा एवं प्रकार के बारे में जानेंगे कारक की परिभाषा और उसके भेद के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।
- मोहन पत्र लिखता है।
- हमें प्रदूषण से बचना चाहिए।
- छात्रों को खूब परिश्रम करना चाहिए।
- प्रातः कल के समय ठंडी वायु चलती है।
- भारतीय संस्कृति अत्यंत प्राचीन है।
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| वाक्य (The Sentence) की परिभाषा एवं प्रकार |
ऊपर की पंक्तियों में कई शब्द (पद) हैं। ये परस्पर मिलकर पूरा अर्थ प्रकट कर रहे हैं इसलिए ये सभी वाक्य हैं।
- राम ने रावण को मारा।
- झाँसी कि रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए।
- पर्वतराज हिमालय भारत का मुकुट कहा जाता है।
- कुछ बच्चे घर के सामने बगीचे में प्रतिदिन खेलते हैं।
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उद्देश्य |
विधेय |
|
राम ने |
रावण को मारा |
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झाँसी की रानी |
अंग्रेजों के छक्के |
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पर्वतराज हिमालय |
भारत का मुकुट |
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कुछ बच्चे |
घर के सामने बगीचे |
- जिनके बारे में कुछ कहा जाए, उसे उद्देश्य (Subject) तथा उद्देश्य की विशेषता बताने वाले शब्दों को उद्देश्य का विस्तार (Enlargement of Subject) कहते हैं।
- उद्देश्य के बारे में जो कुछ कहा जाए, उसे विधेय (Predicate) कहते हैं।
- उद्देश्य में कर्त्ता (Subject) या कर्त्ता का विस्तार (Enlargement of Subject) होता है। जैसे ऊपर के वाक्यों में – ‘राम, लक्ष्मीबाई, हिमालय, बच्चे’ – कर्त्ता तथा ‘झाँसी की रानी’, ‘पर्वतराज’, ‘कुछ’ – कर्त्ता का विस्तार।
- विधेय में क्रिया, कर्म, पूरक, क्रिया-विशेषण आदि होते हैं, इन्हें विधेय का विस्तार कहा जाता है । जैसे – उपर्युक्त वाक्यों में – ‘मारा’, ‘छक्के छुड़ा दिये, कहा जाता है, खेलते हैं’ – क्रिया; ‘रावण’ – कर्म; ‘मुकुट’ – पूरक: ‘प्रतिदिन’- क्रियाविशेषण। ये सभी विधेय के विस्तार हैं।
सरल वाक्य का विग्रह (Analysis of Simple Sentences)
- कर्त्ता (Subject)
- कर्म (Object)
- क्रिया (Verb)
- पूरक(Complement)
- विस्तारपूरक (Extension)
(क) कर्त्ता – जो काम करता है उसे कर्त्ता कहते हैं। जैसे ‘सोहन आया है’-वाक्य में ‘सोहन’ कर्त्ता है।यदि कर्त्ता से पूर्व उसकी विशेषता बताने वाले शब्दों का प्रयोग हो, तो उसे कर्त्ता का विस्तार कहा जाता है। जैसे- ‘छः विद्यार्थी आज विद्यालय नहीं आए – वाक्य में ‘छ’ शब्द कर्त्ता (विद्यार्थी) की विशेषता बताने के लिए प्रयोग किया गया है, अतः विद्यार्थी कर्त्ता तथा ‘छः कर्त्ता का विस्तार है।
(ख) कर्म-जिस पर क्रिया के व्यापार का फल पड़े, उसे कर्म कहते हैं। जैसे- ‘आचार्य ने छात्र को पढ़ाया-वाक्य में ‘छात्र को’ कर्म है। यदि कोई शब्द कर्म की विशेषता बताने के लिए प्रयोग किया जाए तो उसे कर्म का विस्तार कहा जाता है जैसे-
‘आचार्य ने उस छात्र को पढ़ाया’-वाक्य में छात्र को’ शब्द कर्म तथा ‘उस’ कर्म की विशेषता बताने के कारण कर्म का विस्तार है।
(ग) क्रिया-क्रिया वाक्य का अनिवार्य अंग है। इसके बिना कोई वाक्य नहीं बन सकता । (घ) पूरक- आप पढ़ चुके हैं कि कुछ क्रियाएँ अपने अर्थ को पूरा करने के लिए ‘पूरक’ रखती हैं। जैसे- ‘हिमालय एक पर्वत है-वाक्य में ‘पर्वत’ शब्द पूरक है क्योंकि यदि इस शब्द का प्रयोग न करें तो ‘हिमालय एक है’ (The Himalaya is a …..) वाक्य का अर्थ पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता। इसलिए इस वाक्य में ‘पर्वत’ शब्द पूरक की भाँति प्रयोग किया गया है।
(ङ) विस्तारक- विशेषण तथा क्रियाविशेषण के अतिरिक्त कुछ अन्य शब्द भी वाक्य में विस्तारक का कार्य करते हैं। विशेषणों का प्रयोग ‘कर्ता’ या ‘कर्म’ के विस्तार के लिए तथा क्रियाविशेषणों का प्रयोग क्रिया के विस्तार के लिए होता है। इनमें से कुछ शब्दों को तो कर्ता का विस्तार, ‘कर्म का विस्तार’ में रख लिया जाता है, परन्तु फिर भी कई बार अन्य ऐसे शब्द बच जाते हैं जो न तो कर्त्ता का विस्तार हैं तथा न ही कर्म का इन्हें ‘विस्तारक’ शीर्षक में रखना चाहिए जैसे उसका भाई सायं 5 बजे से अपने मित्रों के साथ हिन्दी का गृह कार्य कर रहा है इस वाक्य में ‘उसका कर्त्ता का विस्तार है, हिन्दी का-कर्म का विस्तार है। इस वाक्य में ‘सायं पाँच बजे से अपने मित्रों के साथ-विस्तारक है।सरल वाक्यों का वाक्य-विग्रह करने के लिए नीचे दी गई तालिका बनाई जाती है तथा उसी में विभिन्न शीर्षकों में वाक्य के अंगों का उल्लेख किया जाता है-आइए कुछ वाक्यों का वाक्य-विग्रह करें-
- (क) आज कला प्रतियोगिता में सभी विद्यार्थियों ने उत्साह से भागलिया।
- (ख) शिवाजी बचपन से ही वीर थे।
- (ग) महाबली भीम ने गदा युद्ध में अहंकारी दुर्योधन को हरा दिया।
- (घ) राम के पिताजी बम्बई से मेरे लिए कहानियों की एक पुस्तक लाए ।
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वाक्य |
उद्देश्य |
विधेय |
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कर्त्ता |
कर्त्ता का विस्तार |
क्रिया |
क्रिया का पूरक |
कर्म |
कर्म का विस्तार |
विस्तारक |
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आज…. चित्र |
विद्यार्थियों |
सभी |
भाग लिया |
X |
X |
X |
आज कला प्रतियोगिता |
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बचपन …. थे। |
शिवाजी |
X |
थे |
वीर |
X |
X |
बचपन से ही |
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महाबली ….. |
भीम ने |
महाबली |
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गदा युद्ध में |
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राम …. लाए |
पिताजी |
राम के |
लिए |
X |
पुस्तक |
कहानियों की एक |
मुंबई से मेरे |
वाक्य के प्रकार (Types of Sentences)
(क) अर्थ के आधार पर वाक्य निम्नलिखित आठ प्रकार के माने गए हैं :
- 1. विधानवाचक (Assertive Sentence) |
- 2. निषेधवाचक या नकारात्मक (Negative Sentence) ।
- 3. प्रश्नवाचक (Interrogative Sentence) |
- 4. सकेतवाचक (Conditional Sentence) |
- 5. संदेहवाचक (Sentence Indicating Doubt ) ।
- 6. इच्छावाचक (Illative Sentence) |
- 7. आज्ञावाचक (Imperative Sentence)|
- 8. विस्मयादिवाचक (Exclamatory Sentence) ।

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