लिंग (Gender) की परिभाषा, भेद एवं पहचान
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    नमस्कार मित्रों सभी के प्रणाम, अन्य पोस्ट की तरह इस बार की पोस्ट में भी आपको  कुछ अमूल्य जानकारी मिलेगी। आज के विषय में लिंग (Gender) की परिभाषा, भेद एवं पहचान के बारे में जानेंगे।

    लिंग (Gender) की परिभाषा, भेद एवं पहचान
    लिंग (Gender) की परिभाषा, भेद एवं पहचान

    निम्नलिखित वाक्यों को पढिए:

    बालक पढ़ता है।

    बालिका पढ़ती है।

    चाचा जी पत्र लिख
    रहे हैं।

    चाची जी खाना बना
    रही है।

    बंदर नाच दिखा
    रहा है।

    बंदरिया पेड़ पर
    बैठी है।

    भाई राखी बँधवा
    रहा है।

    बहिन राखी बांध
    रही है।

    बैल घास खा रहा
    है।

    गाय दूध दे रही
    है।

    उपर्युक्त वाक्यों से स्पष्ट है कि ‘पहले’ वर्ग में बालक, चाचा जी, बंदर, भाई तथा बैल पुरुष वर्ग के हैं, तथा दूसरे वर्ग के में बालिका, चाची जी, बंदरिया, बहिन तथा गाय स्त्री वर्ग के हैं।

    लिंग कि परिभाषा

    शब्द के जिस रूप से पुरुष या स्त्री जाति का बोध हो, उसे लिंग कहते हैं। हिन्दी भाषा में ‘लिंग’ का अर्थ है ‘चिह्न’ । इन्हीं चिन्हों  से हमें पता चलता है कि कोई शब्द पुरुष जाति का ही अथवा स्त्री जाति का।

     लिंग के भेद

    हिन्दी में लिंग के दो भेद हैं:
    1. पुल्लिंग (Masculine) – शब्द के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु आदि के पुरुष जाति का बोध हो, उन्हें पुल्लिंग कहते हैं। जैसे – बंदर, चूहा, गधा, मोर, लड़का, पिता, दादा, चित्र आदि।
    2. स्त्रीलिंग (Feminine) – जो शब्द स्त्री जाति का बोध कराएं, उसे स्त्रीलिंग के नाम से जाना जाता है। जैसे – बंदरिया, चुहिया, गढ़ी, मोरनी, लड़की, माता, दादी, तस्वीर, बुढ़िया आदि।

    लिंग कि पहचान

    संज्ञा – शब्द दो प्रकार के होते हैं – प्राणिवाचक तथा अप्राणिवाचक। प्राणिवाचक शब्दों का लिंग पहचानना कठिन नहीं है। अगर वे पुरुष जाति का बोध कराते है, तो प्राय: पुल्लिंग और यदि स्त्री जाति का बोध कराते है, तो प्राय: स्त्रीलिंग माने जाते है। इन नियमों के कुछ अपवाद (Exceptions) भी हैं। कुछ प्राणिवाचक शब्द सदा पुल्लिंग होते है, तो कुछ सदा स्त्रीलिंग। जैसे –
    नित्य (सदा) पुल्लिंग रहने वाले कुछ शब्द –  गरुड, बज, तोता, चीता, मच्छर, उल्लू, कछुवा, खटमल, खरगोश, बिच्छू आदि। इंका स्त्रीलिंग बनने के लिए ‘मादा’ शब्द जोड़ दिया जाता है, जैसे मादा तोता।
    नित्य (सदा) स्त्रीलिंग रहने वाले कुछ शब्द – मक्खी, मैना, मछ्ली, कोयल, चील, छिपकली, मकड़ी, गिलहरी आदि। इनके पुल्लिंग बनाने के लिए नर शब्द जोड़ दिया जाता है जैसे नर मक्खी।
    हम हमेशा यही कहते हैं –

    तोता आम खाता है।

    मक्खी गंदगी फैलती
    है।

    चीता तेज भागता
    है।

    मछली जल की रानी
    है।

    उल्लू रात में
    देख सकता है।

    कोयल मीठा गति
    है।

    मच्छर गंदगी फैलता
    है।

    चील उड़ती है

    ये जीव चाहे नर हों या मादा, इनका प्रयोग इसी प्रकार होता है
    • नर मक्खी गंदगी फैलती है।
    • मादा मक्खी गंदगी फैलती है।
    वास्तविक समस्या उन शब्दों की है जो प्राणिवाचक नहीं अर्थात जो न तो नर हैं और न मादा। जैसे – आकाश, मेज, कुर्सी, चित्र, छाता आदि। व्यवहार, शब्द-कोश (Dictionary), माता – पिता, गुरु तथा परम्परा आदि का सहारा लेकर हम ऐसे शब्दों का लिंग निर्णय करते हैं।
    लिंग – निर्णय सम्बन्धी कुछ नियम नीचे दिये जा रहे हैं।
     
    पुल्लिंग की पहचान:
    (क) ‘अकारान्त तत्सम संज्ञाएँ प्रायः पुल्लिंग होती हैं। जैसे- तन, मन, धन, वन, उपवन, आचरण, नाटक, सागर, बंजर, पत्र, चित्र, मित्र, पुष्प आदि ।
    (ख) ‘अ’ से अन्त होने वाले हिन्दी के तद्भव शब्द भी प्रायः पुल्लिंग होते हैं। जैसे-मेज, जंगल, घर, आम, आग, दूध, गाँव आदि ।
    (ग) आ, आव, पा, पन, न, क, ख, आवा तथा औड़ा से अन्त होने वाली संज्ञाएँ प्रायः पुल्लिंग होती हैं। जैसे –
    -लोटा, मोटा, छाता, झगड़ा, चिमटा, पहिया, पैसा, हलुआ आदि ।
    आव-चढ़ाव, बहाव, उतराव, दुराव, छिपाव आदि ।
    पा-बुढ़ापा, पुजापा आदि ।
    पन-बचपन, पागलपन, लड़कपन, अपनापन आदि ।
    -यौवन, लेन-देन, हवन, नयन आदि ।
    – पाठक, गायक, नायक, सायक आदि ।
    त्व-पशुत्व, मनुष्यत्व, नरत्व, स्त्रीत्व, देवत्व, राक्षसत्व आदि।
    आवा-पहनावा, बुलावा, दिखावा, पहरावा आदि ।
    औड़ा-पकौड़ा, हथौड़ा, भगौड़ा आदि ।
    (घ) पर्वतों, वारों, ग्रहों, रत्नों, पेड़ों, अनाजों, द्रव पदार्थों, समुद्रों, देशों तथा महीनों के नाम प्रायः पुंल्लिंग होते हैं। जैसे :
    पर्वत-हिमालय, यूराल, विन्ध्याचल, सतपुड़ा आदि ।
    वार – सोमवार, शनिवार, बृहस्पतिवार आदि । ग्रह-सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, राहु-केतु आदि। (पृथ्वी स्त्रीलिंग है) ।
    रत्न – हीरा, पन्ना, मोती, मूँगा, पुखराज आदि ।
    पेड़- नीम, शीशम, अशोक, बरगद, पीपल आदि। (इमली स्त्रीलिंग)
    अनाज-गेहूँ, चना, जौ, बाजरा आदि । (मक्खी, ज्वार, अरहर, मूँग स्त्रीलिंग हैं)।
    द्रव पदार्थ-सोना, ताँबा, दूध, पानी, कोयला, तेल, घी, आदि। (चाँदी, चाय, कॉफी, लस्सी, चटनी आदि स्त्रीलिंग हैं) ।
    समुद्र – हिन्द महासागर, अरब सागर, प्रशान्त महासागर, काला सागर आदि ।
    देश – भारत, चीन, जापान, रूस, अमेरिका आदि। (श्रीलंका स्त्रीलिंग है)।
    महीने – मार्च, अप्रैल, चैत्र, बैसाख, सावन, भादों आदि। (जनवरी, फरवरी, मई, जुलाई, स्त्रीलिंग हैं) ।
    (ङ) शरीर के कुछ अंग पुंल्लिंग होते हैं। जैसे-सिर, मस्तक, कान, मुँह, गला, हाथ, पैर, अँगूठा, घुटना, हृदय, दाँत आदि ।
    (च) वर्णमाला के अक्षर पुंल्लिंग होते हैं। जैसे -क्, च्, ट्, त्, प्, अ, आ, उ, ऊ, आदि। (इ, ई, ऋ स्त्रीलिंग हैं)।
    (छ) ‘खाना’ से अन्त होने वाले शब्द पुंल्लिंग होते हैं। जैसे- चिड़ियाखाना, पागलखाना, जेलखाना, डाकखाना आदि ।
    (ज) ‘दान’ से अन्त होने वाले शब्द पुंल्लिंग होते हैं। जैसे- फूलदान, पीकदान, कमलदान, इत्रदान आदि ।
    (झ) ‘वाला’ से अन्त होने वाले शब्द पुंल्लिंग होते हैं। जैसे- – फूलवाला, दूधवाला, चायवाला, पानवाला आदि।
    (ञ) ‘एरा’ से अन्त होने वाले शब्द पुंल्लिंग होते हैं। जैसे-चचेरा, ममेरा, सँपेरा, लुटेरा आदि।
    स्त्रीलिंग की पहचान
    (क) संस्कृत के आकारान्त शब्द स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे-दया, कृपा, अहिंसा, परीक्षा, सूचना, माया, सभा, प्रतिमा, प्रतिज्ञा आदि ।
    (ख) उकारान्त तत्सम संज्ञाएँ स्त्रीलिंग होती हैं। जैसे-मृत्यु, आयु, वस्तु ऋतु, वायु आदि। (साधु, गुरु पुंल्लिंग हैं)।
    (ग) भाषाओं के नाम स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत: जापानी आदि ।
    (घ) ईकारान्त संज्ञाएँ प्रायः स्त्रीलिंग होती हैं। जैसे-रोटी, नदी, चिट्ठी, रोशनी, नौकरी, चोटी, दूरी, लाली, गर्मी, सर्दी आदि। (पानी, मोती, घी, हाथी, आदमी, पक्षी आदि पुल्लिंग हैं)।
    (ङ) शरीर के कुछ अंग स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे-ठोड़ी, भौं, पलक, आँख, नाक, जीम, टाँग, जाँघ आदि।
    (च) बोलियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे-पहाड़ी, कश्मीरी, खड़ी बोली, हरियाणवी, राजस्थानी आदि।
    (छ) जिन शब्दों के अन्त में ‘आवट, इया, ता, आई, आहट आदि आते हैं; वे प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे :
    आवट-सजावट, बनावट, बुनावट, थकावट, मिलावट आदि ।
    इया – बुढ़िया, लुटिया, चुहिया, बंदरिया, डिबिया, लठिया, कुटिया । आदि
    ता-मित्रता, पशुता, शत्रुता, दासता, सरलता, शिशुता, आदि।
    आई – चढ़ाई, पढ़ाई, लड़ाई, सिलाई, बुराई, भलाई, लिखाई आदि।
    आहट-कड़वाहट, घबराहट, मुस्कराहट, चिकनाहट, गरमाहट आदि।
    (ज) नी, ‘इमा से अन्त होने वाले शब्द प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे –
    नी-करनी, भरनी, छलनी, जननी, ओढ़नी आदि।
    इम:- कालिमा, लालिमा, हरीतिमा, नीलिमा आदि ।
    (झ) नदियों तथा झीलों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं जैसे-
    नदी – गंगा, यमुना, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, झेलम, अमेजन, मिसीसिपी आदि।
    झील-डल, चिलका, बेकाल आदि।
    (ञ) इकारान्त संज्ञाएँ प्रायः स्त्रीलिंग होती हैं। जैसे-अग्नि, राशि, विधि, जाति, भक्ति शक्ति, हानि आदि। (कवि, मुनि, रवि, शशि, गिरि आदि पुल्लिंग हैं)।
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    Hari Mohan

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